Friday, January 27, 2023
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Goat Farming: बकरी पालन हेतु इन नस्ल की बकरियों को लाये ये आपको देगी तगड़ी कमाई

Goat Farming: बकरी पालन हेतु इन नस्ल की बकरियों को लाये ये आपको देगी तगड़ी कमाई बकरी पालन का व्यवसाय काफी तेजी से बढ़ रहा है। बकरी पालन कम लगात में अधिक उत्पादन देने वाला व्यवसाय माना जाता है। बकरियों का रखरखाव भी काफी आसान और सस्ता होता है। इसकी अच्छी नस्ल का पालन करके किसान कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।

बकरी पालन हेतु इन नस्ल की बकरियों को लाये

Goat Farming: बकरी पालन हेतु इन नस्ल की बकरियों को लाये ये आपको देगी तगड़ी कमाई

बकरी पालन के लाभ
बकरी पालन बहुत ही कम पूंजी और खर्च में किया जा सकता है।बकरियों को चराने से साथ-साथ घर का बचा खाना भी दे सकते हैं।बकरी 10-12 माह में बच्चे देना शुरू कर देती है। बकरियां ठंडी और गर्मी दोनों जलवायु में रह सकती हैं। बकरी से बच्चे, खाद तुरंत पैसे और अन्य लाभ मिलता है।

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बकरी पालन कैसे करें
बकरी पालन के लिए नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र के जरिए प्रशिक्षण ले सकते हैं। शुरूआत में बकरी पालन का व्यवसाय 10-15 बकरियों से करें। बकरी पालन के लिए उन्नत नस्लों का ही चुनाव करें। बरबरी, सिरोही जैसी नस्लों का फार्म 2-2.5 लाख में शुरू कर सकते हैं। बकरी को घर पर भूसा, दाना, हरा चारा, ताजा पानी देकर पाल सकते हैं। बकरी को बाहर का आहार और कुछ मात्रा में घर का आहार देकर कम खर्च में पाल सकते हैं। समय पर टीकाकरण कराएं, जिससे बीमारी कम होती है। शेड के लंबाई पूर्व से पश्चिम दिशा में रखें। शेड के लिए सूखी जगह आवश्यक है। बकरी पालन के लिए नाबार्ड, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, राज्य सहकारी बैंक, वाणिज्यिक बैंक से लोन ले सकते हैं। पशुपालन विभाग से लोन की कार्यवाही पूर्ण होने पर बैंक से लोन सकते हैं। लोन पर 25 से 33 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिलती है। लोन के लिए आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो, निवास प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक जरूरी होती है।

बकरी पालन के लिए प्रमुख नस्लें

उस्मानाबादी

उस्मानाबादी नस्ल आमतौर पर महाराष्ट्र के उस्मानाबाद जिले में पाली जाती है। लेकिन इसे महाराष्ट्र के अहमदनगर, लातूर, परभणी, सोलापुर आदि जिलों में भी पाला जाता है। इस नस्ल का पालन मांस और दूध के लिए किया जाता है।

इन नस्ल की बकरियों को लाये ये आपको देगी तगड़ी कमाई

उस्मानाबादी नस्ल की विशेषताएं

यह मध्यम आकार की बकरी होती है। आमतौर पर इसका रंग काला होता है, लेकिन भूरे, सफेद और मिश्रित रंगों में भी पाई जाती है। इसके कान लंबे और सिर पर पीछे की ओर जाते हुए सीधे सींग होते हैं। नर का वजन 35 किलो और मादा का वजन 32 किलो तक होता है। ये बकरी एक दिन में 1 से 1.5 किलो तक दूध देती है। बाजार में 400-500 रुपए प्रति किलो तक इसके मांस बिक जाते हैं। इसके दूध में कई औषधीय गुण होते हैं। इसके दूध 100 रुपए लीटर तक बिक जाता है।

बीटल बकरी

बीटल नस्ल पंजाब और हरियाणा राज्यों में पाई जाती है। बीटल बकरी का पालन मांस और डेयरी उद्देश्य दोनों के लिए किया जा सकता है। बीटल नस्ल की विशेषताएं इसके शरीर पर सफेद और भूरे धब्बे होते हैं। सींग चपटे, बाहर और पीछे की ओर मुड़ी होती है। नाक उठी हुई और कान काफी लंबी होती है। बकरी में दाढ़ी होती है। ये नस्ल एक बार में 2 बच्चों को जन्म देती है। बकरों में मांस का प्रतिशत अधिक होता है।

सिरोही नस्ल

इसका जन्म स्थान राजस्थान का सिरोही जिला है। इस नस्ल को घर पर रखकर या चराकर भी तरह पाल सकते हैं। सिरोही नस्ल की विशेषताएं यह रंग में डार्क ब्राउन, लाइट ब्राउन होता है। शरीर पर डार्क ब्राउन और लाइट ब्राउन के धब्बे होते हैं। पूंछ मुड़ी और घने बालों से ढकी हुई होती है। कानों की लंबाई मध्यम, नीचे की ओर लटके होते हैं। दुग्ध उत्पादन क्षमता 2-2.5 लीटर प्रतिदिन होती है। नस्ल दूध और मांस दोनों के लिए उपयुक्त है।

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